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Petrol Diesel Price Hike: देशभर में फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, जानिए दिल्ली-कोलकाता समेत बड़े शहरों की नई कीमतें

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देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली, कोलकाता समेत कई शहरों में ईंधन महंगा हो गया है। जानिए नई कीमतें, बढ़ोतरी की वजह और इसका आम लोगों पर असर।

देशभर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार दूसरी बार ईंधन के दामों में बढ़ोतरी होने से महंगाई का दबाव और गहरा होने लगा है। मंगलवार को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक की वृद्धि कर दी। इससे पहले कुछ दिन पहले भी तेल कंपनियों ने दोनों ईंधनों की कीमतों में करीब तीन रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया था। लगातार बढ़ रही कीमतों का असर अब आम आदमी की जेब से लेकर बाजार और परिवहन व्यवस्था तक साफ दिखाई देने लगा है।

राजधानी New Delhi में पेट्रोल की कीमत बढ़कर लगभग 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। वहीं डीजल भी 91 रुपये प्रति लीटर के पार चला गया है। इससे पहले दिल्ली में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतें अपेक्षाकृत कम थीं, लेकिन नई वृद्धि के बाद वाहन चालकों का खर्च और बढ़ गया है। रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले लोगों, टैक्सी चालकों और छोटे व्यापारियों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

वहीं Kolkata में पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक उछाल दर्ज किया गया है। यहां पेट्रोल 109 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है। डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी तरह Mumbai और Chennai समेत देश के कई बड़े शहरों में ईंधन महंगा हो गया है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स और वैट की दरों के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है, लेकिन बढ़ोतरी का असर लगभग हर जगह महसूस किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह है। पिछले कुछ सप्ताह में वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच टकराव की स्थिति ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिखाई दिया और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली गईं।

जानकारों के अनुसार कुछ समय पहले तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था, लेकिन हालिया तनाव के बाद इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे देशों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। आयात महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर पड़ता है।

तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कम कीमत पर ईंधन बेचने के कारण उन्हें भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा था। कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार महंगा हो रहे कच्चे तेल के बावजूद लंबे समय तक कीमतों को स्थिर रखने से नुकसान बढ़ा। अब उस घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है। हालांकि विपक्षी दल सरकार पर आम जनता पर बोझ बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं और टैक्स में राहत देने की मांग कर रहे हैं।

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव पूरे बाजार पर पड़ता है। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है, जिससे फल, सब्जी, दूध, अनाज और रोजमर्रा के अन्य सामानों की कीमतें भी प्रभावित होती हैं। ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ते डीजल के दामों ने परिवहन व्यवसाय की लागत बढ़ा दी है। यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले दिनों में माल भाड़ा बढ़ाना मजबूरी हो जाएगा।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहीं तो महंगाई दर पर और दबाव बढ़ सकता है। पेट्रोल और डीजल महंगा होने से उत्पादन लागत और परिवहन खर्च दोनों बढ़ते हैं, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ता है। ऐसे में आम लोगों की घरेलू बजट व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है।

मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह बढ़ोतरी बड़ी परेशानी बनती जा रही है। जिन लोगों की रोजाना लंबी दूरी की यात्रा होती है, उनके मासिक खर्च में काफी वृद्धि दर्ज की जा रही है। वहीं छोटे व्यवसायी और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े लोग भी बढ़ती लागत को लेकर चिंतित हैं। कई शहरों में ऑटो और टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग भी उठने लगी है।

सरकार फिलहाल हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन अभी तक किसी बड़ी राहत की घोषणा नहीं की गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर ही आगे की कीमतें तय होंगी। यदि वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो पेट्रोल और डीजल के दामों में आगे भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

देश में लगातार दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार टैक्स में कुछ राहत देकर कीमतों को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाएगी। फिलहाल वाहन चालकों से लेकर व्यापारियों तक सभी की नजरें तेल कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अगले रुख पर टिकी हुई हैं।

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